बरसी तप रा गीत
लय - चांद चढ्यो जिगनार
रचयिता - मुनिश्री कन्हैयालालजी
बरसी तप रा गीत, म्हे तो गावाला जी गावांला
आखातीज पुनीत, हर्ष मनावांलाजी मनावांला ॥
ऋषभ प्रभु रो ध्यान, हरथम ध्यावालाजी ध्यावांला ॥
श्रद्धा रा दो फूल, आज चढ़ावगंलाजी चढ़ावाला ॥
तप सूरज रो तेज, सबने सुणावालाजी सुणावाला ॥
तपसी हुआ अनेक, स्मृति में ल्यावांलाजी ल्यावांला ॥
तप स्यू करमा री कोड, सकल खपावांलानी खपावाला ॥
धर्म री बंसी बजाय, जग ने जगावांलाजी जगावांला ॥
श्रेयांस सरीसो दान,कद म्हे देवांलाजी देवाला ||
महाप्रज्ञ रे दरबार, मिलजुल जावालाजी जावांला ॥
'मुनि कन्हैया' सीख दिल में स्मावालाजी रमावाला ॥
December 28,2022 / 11:27 PM
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